Festivals

Dussehra Date Images pictures essay (Vijaydashami puja)

Dussehra
Written by admin

Vijayadashami-Dussehra Festival 2017 

“”दशहरा शब्द” दो शब्दों से मिलकर बनाया गया है जैसे दश से तात्पर्य दश मुखों वाले रावण से है ! और हारा से तात्पर्य श्री राम दवारा मिली पराजय से है ! दशहरा शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है! इस त्यौहार का आयोजन अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को होता है!

इस शुभ दिन में श्री राम जी ने राक्षस रावण का संहार किया था और दशहरा के पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के नाम से मनाया जाता है तो चलिए दोस्तों जानते है कि दशहरे का क्या महत्व है और क्यों मनाया जाता है यह दशहरे का पर्व !

Importance of vijayadashami {दशहरे का क्या महत्व है}

दशहरा हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है! यह दिन का हिन्दू लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक पौराणिक गाथा जुडी हुई है और वो गाथा यह है कि इस शुभ दिन ही श्री राम चंद्र जी ने लंकापति रावण पर विजय हासिल की थी और अपनी धर्मपत्नी सीता जी को रावण की कैद से मुक्त करवाया था!

इस दिन हिन्दू लोग नए नए काम शुरू करते है क्योंकि उनको लगता है, इस दिन किये जाने वाले हर कार्य में उनको भी रामचंद्र जी की तरह विजय मिलेगी इसलिए सब businessmen नई नई companies में अपना पैसा invest करते है क्योंकि उनको लगता है !

कि अगर वह ऐसा करेंगे तो उनको सफलता अवश्य मिलेगी! और भी इस त्यौहार का भारतियों के जीवन विशेष महत्व है ! विजयादशमी के दिन अगर आप चाहते है कि धनलक्ष्मी की प्राप्ति करना तो आप इसे पोस्ट को पढ़े :- Dhan prapti ke upay

यह बुरे आचरण पर अच्छे आचरण की जीत के रूप में मनाया जाता है और पूरे देश भर में इसे बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है प्रतेक व्यक्ति इस त्यौहार को लेकर उत्साहित होता है !

इस दिन लेकिन जश्न मनाने की सबकी अलग-अलग मान्यताएं होती है कई लोग अपनी फसल की अच्छी पैदावार होने के कारण इसे बहुत ख़ुशी से मनाते है

तो कुछ लोग अपने औजारों की पूजा करते है क्योंकि युद्ध में इन्ही औजारों की वजह से उनको इतना अच्छा निष्कर्ष मिला है अच्छी पैदावार के रूप में!

Ramnavmi Puja 

जिनके सुंदर नाम को ह्रदय में बसा लेने मात्र से सारे काम पूर्ण हो जाते हैं जिनके समान कोई दूजा नाम नहीं है जिनके स्मरण मात्र से सारे संकट मिट जाते हैं ऐसे प्रभु श्रीराम को मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता. हूं..

पौराणिक कथानुसार राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था

इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या आते हैं और प्रातःकाल सरयू नदी में स्नान कर भगवान के मंदिर में जाकर भक्तिपूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं !

राम नवमी के दिन जगह-जगह रामायण का पाठ होता है कई जगह भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं !

Dussehra Puja :- How To Celebrate Dussehra Festival at home

दशहरा या विजयदशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है ! इस दिन राम ने रावण का वध किया था ! रावण भगवान राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गये था, भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे!

उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है!

दशहरे के पर्व को मनाने के लिए बहुत सारे आयोजनों का प्रबंध किया जाता है और जगह जगह मेले भी होते है जिसमे तरह-तरह के खिलौने, झूले और मिठाईयाँ मिलती है और मेलों में बहुत ज्यादा चहल-पहल देखने को मिलती है!

दशहरे वाले दिन तीन पुतले बनाये जाते है एक रावण का एक मेघनाथ का और एक कुम्भकर्ण का और फिर शाम के समय इन तीनो पुतलों को जलाया जाता है!

Essay on Dussehra in Hindi

विजयदशमी के पीछे बहुत सारी कहानियाँ है जिनमें से सबसे प्रचलित कहानी यह है कि इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी ने रावण के घमंड को चूर चूर कर दिया था!

श्री राम जी अयोध्या के राजकुमार थे और उनके पिता जी का नाम राजा दशरथ था! जब राम जी का विवाह होने के बाद राजा दशरथ के दिमाग में राम जी को राजसिंहासन पर बैठाने का विचार आया तभी राजा की तीसरी रानी कैकई को उसकी दासी ने भड़का दिया कि राम की जगह भरत को सिंहासन पर बैठाना चाहिए और राम को वनवास मिलना चाहिए!

यही कारण था कि श्री राम जी को वनवास जाना पड़ा और उनके साथ उनकी पत्नी सीता जी और उनके भाई लक्ष्मण जी भी चले गए और वो तीनो वन में जाकर घास की झोपड़ी बनाकर रहने लगे! लेकिन एक दिन लंकापति रावण छल से सीता का अपहरण करके अपने साथ लंका ले गया और फिर वहीँ से शुरुआत हुई रावण के अंत की !

सीता माता को छुड़ाने के लिए पहले तो श्री राम जी ने विनम्रता से आग्रह किया कि रावण सीता को मुक्त कर दो लेकिन रावण नहीं माना और परिणामस्वरूप श्री राम जी और रावण में बहुत भयानक युद्ध छिड़ गया और अंत में रावण की हार हो गई और श्री राम जी ने उसका वध कर दिया!

इसलिए कहा जाता है दोस्तों कि बुराई का अंत बुरा ही होता है उसका बहुत बड़ा उदाहरण हमारे समक्ष रावण है !

इसलिए हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इस त्यौहार का आनंद उठाइए और अपने अंदर मौजूद बुराई का अंत कर दीजिये अन्यथा रावण का क्या अंत हुआ वो तो हम सब भली भांति जानते ही है और अब तो आप भी समझ ही गए होंगे!

Durga puja Date 

दशहरा के दौरान भारत के कई शहरों, विशेषकर कोलकाता में धूम-धाम से दुर्गा पूजन किया जाता है !  इस दौरान शहर के प्रमुख स्थानों पर बड़े-बड़े  भव्य पांडाल लगाए जाते हैं ! जिसे जगमगाती रौशनी व लाइटों से सजाया जाता है! पांडाल के अन्दर माँ दुर्गा व अन्य देवी देवताओं की बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं ! सिंह पर सवार माँ दुर्गा का राक्षस वध करते हुए सजाई गयी मूर्तियाँ न सिर्फ बच्चों बल्कि बड़े लोगों को भी खूब आकर्षित करती हैं ! 

Durga puja celebration

दुर्गा पूजा नौ दिन तक चलने वाला त्योहार है दुर्गा पूजा के दिनों को स्थान, परंपरा, लोगों की क्षमता और लोगों के विश्वास के अनुसार मनाया जाता है ! कुछ लोग इसे पाँच, सात या पूरे नौ दिनों तक मनाते हैं, लोग दुर्गा देवी की मूर्ति की पूजा “षष्टी” से शुरु करते हैं, जो “दशमी” पर खत्म होती है समाज या समुदाय में कुछ लोग पास के क्षेत्र में पंडाल को सजा कर मनाते हैं ! इन दिनों में, आस-पास के सभी मन्दिर विशेषरुप से, सुबह में पूरी तरह से भक्तिमय हो जाते हैं कुछ लोग घरों में ही सभी व्यवस्थाओं के साथ पूजा करते हैं और अन्तिम दिन मूर्ति के विसर्जन करने के लिए जाते हैं !

Durga puja festival

दुर्गा शक्ति की देवी है और इसे दिन शक्ति की पूजा की जाती है इसे दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर राक्षस को मारा था और मनुष्य जाति का भला किया था इसे वहाँ शक्ति पूजा के नाम से भी जाना जाता है!

सभी देवताओं और देवियों में माँ दुर्गा को सबसे ऊँचा स्थान दिया जाता है, क्योंकि उन्हीं से ससार को सभी प्रकार की शक्तियाँ मिलती हैं इसीलिए दुर्गा पूजा का महत्त्व (Importance) भी अन्य पूजा-पाठ से बढ़कर माना जाता है

दुर्गा पूजा पर स्त्रियाँ मनमोहक गरबा इत्यादि धार्मिक नृत्य के साथ माँ दुर्गा की आरती कर  उपासना करती हैं ! दुर्गा पूजा पर उत्साही लोगो के साथ, रंगीन रोशनी मै रंगा हुआ शहर एक अदभूत चित्र का सर्जन करता है,

भारत के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा का महोत्सव पूरे चार दिन तक चलता है, और उसके पश्चात दुर्गा माँ की स्थापित की हुई मूर्ति को नदी यां सरोवर में विसर्जन करने की प्रथा है

कहीं-कहीं दुर्गा मन्दिरों में स्थायी मूर्तियाँ भी रहती हैं ! देवी की पूजा अर्चना पूरे दस दिनों तक होती रहती है ! दुर्गा पूजा के दिनों में सरकारी छुट्‌टियाँ (Government) रहती हैं और स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालय कार्यालय आदि बन्द रहते हैं ! सब तरफ मेला और उत्सव का वातावरण रहता है !

Durga puja wishes,

ख़ुशी और मुस्कान भरी हो आपकी ये दुर्गा पूजा
इस वर्ष आपको परिवार के साथ लाये
ये साल आपके लिए खुशी से भर हो
यह वर्षा माँ दुर्गा आशीर्वाद देने के लिए हमारे घरो में आये
दुर्गा पूजा पर आप सबकी इच्छाओ की पूर्ति हो,

Durga puja sms 

दुर्गा पूजा के अवसर पर
आपको और आपके परिवार को खुशियां मिले
हर काम पूरा , हर पल सुखदायी
दूर हो जाए सब शिकवे गीले
दुर्गा पूजा की शुभकामनायें

भारत के विभिन्न प्रदेशों का दशहरा पर्व

  • दशहरा पर्व के दिन दिल्ली मे लंका कांड अध्याय पर रामलीला रचाई जाती है।
  • मैसूर का दशहरा मशहूर है। इसे देखने विदेशी सैलानी भी इकठ्ठा होते हैं। मैसूर महल को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और सुसज्जित हाथियों का भव्य जूलूस निकाला जाता है।
  • हिमाचाल प्रदेश में मनाया जाने वाला कुल्लू का दशहरा भी काफी प्रसिद्द है। यहाँ पर लोग नए-नए कपड़े पहन कर तैयार होते हैं और अपने ईष्ट देवी-देवताओं को पालकी में बैठाकर घूमाते हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़े तथा अन्य वाद्य यंत्र बजाये जाते हैं।

दशहरा के सही मायने

दोस्तों बुराई हमारे बाहर नहीं होती बल्कि बुराई तो हमारे भीतर ही होती है लेकिन अक्सर लोग दूसरों में बुराईयां ढूंढ़ते रहते है जबकि यह नहीं देखते कि उनमें कितनी बुराईयां है इसलिए तो कहा जाता है कि हमें दूसरों के ऊपर तो एक छोटा सा सरसों का बीज तक दिख जाता है लेकिन अपने ऊपर पड़ा मक्की का दाना तक नहीं दिखता है!

इसलिए दोस्तों अगर आप सच में यह दशहरे का पर्व मनाना चाहते हो तो बेहतर होगा कि आप अपने अंदर की बुराई का सबसे पहले नाश करो तभी आप इस त्यौहार का आनंद उठा पाओगे!

Govardhan Puja kaise kare

दशहरा के बीस दिन बाद दिवाली आती है और दीपावली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की जाती है लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं!  इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है ! इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है !

गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है शास्त्रों में बताया गया है, कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती जैसे नदियों में गंगा ! गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है ! और इसके साथ कैसे करे भगवान को खुशी आईये जानते है इसे पोस्ट के जरिये :-  Bhakti kaise kare aakhir kaise honge bhagwan khush

देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं, उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं ! इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है, इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है !

गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है, और इसके प्रतीक के रूप में गाय की पूजा किया जाती है !

Happy bhaiya dooj

भाई दूज, भाई- बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है, जिसे यम द्वितीया या भैया दूज (Bhaiya Dooj) भी कहते हैं  ! यह हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जिसे कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है !

इस दिन चाहिए कि बहनें भाइयों को चावल खिलाएं ! इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है ! बहन चचेरी अथवा ममेरी कोई भी हो सकती है ! यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है

ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता, इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है

Chhath puja kaise manaye

भैया दूज के बाद छठ पूजा भी मनाये जाता है  कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन छठ पूजा की जाती है !

इस पूजा का आयोजन पूरे भारत वर्ष में एक साथ किया जाता है ! भगवान सूर्य को समर्पित इस पूजा में सूर्य को अध्र्य दिया जाता है ! पूजन में शरीर और मन को पूरी तरह साधना पड़ता है, इसलिए इस पर्व को हठयोग भी कहा जाता है !

छठ हिंदू त्यौहार है जो हर साल लोगों द्वारा बहुत उत्सुकता के साथ मनाया जाता है! ये हिंदू धर्म का बहुत प्राचीन त्यौहार है, जो ऊर्जा के परमेश्वर के लिए समर्पित है जिन्हें सूर्य या सूर्य षष्ठी के रूप में भी जाना जाता है! और इसके साथ रोज़ पूजा क्यों करे आईये जानते है इसे पोस्ट को पढ़े करे : – Mana Ki Shanti Kaise Paye

लोग पृथ्वी पर हमेशा के लिये जीवन का आशीर्वाद पाने के लिए भगवान सूर्य को धन्यवाद देने के लिये ये त्यौहार मनाते हैं ! लोग बहुत उत्साह से भगवान सूर्य की पूजा करते हैं और अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और बुजुर्गों के अच्छे के लिये सफलता और प्रगति के लिए प्रार्थना करते हैं ! हिंदू धर्म के अनुसार सूर्य की पूजा कुछ श्रेणी रोगों के इलाज से संबंधित है जैसे कुष्ठ रोग आदि

और इसके साथ ही इस आर्टिकल को अपने friends के साथ भी शेयर कीजिये और comment भी जरूर करें!

About the author

admin

Leave a Comment